
Coaching और लाखों का खर्च नहीं, 12 से 15 घंटे पढ़ाई…UPSC क्रैक कर IAS की कुर्सी तक का सफर ऐसा
UPSC Success Story of Vandana Meena in Hindi: भारत में UPSC (Union Public Service Commission) को सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. हर साल लाखों छात्र IAS, IPS बनने का सपना देखते हैं लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती है जो धैर्य, मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ते हैं. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है राजस्थान की वंदना मीणा की. जिन्होंने बिना कोचिंग और सीमित संसाधनों के बावजूद UPSC की कठिन परीक्षा पास करके इतिहास रच दिया. आइए पढ़ें वंदना मीणा की सफलता की कहानी (UPSC Success Story of Vandana Meena in Hindi) जो आपको अपने सपनों को पूरा करने का हौसला देगी.
यहां से शुरुआत (UPSC Success Story of Vandana Meena in Hindi)
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वंदना मीणा राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के गांव टोकसी की रहने वाली हैं. उनके पिता पृथ्वीराज मीणा दिल्ली पुलिस में अधिकारी हैं और उनकी माता संपती देवी हाउसमेकर हैं. बचपन से ही वंदना पढ़ाई में तेज थीं और उनका सपना था कि वह देश की सेवा सिविल सर्विसेज के माध्यम से करें. बेहतर शिक्षा के लिए उनका परिवार दिल्ली शिफ्ट हुआ.
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पढ़ाई की नींव (UPSC Success Story of Vandana Meena in Hindi)
वंदना ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गंगापुर सिटी के ज्ञान रश्मि सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की. इसके बाद उन्हें दिल्ली के सेंट कोलंबा स्कूल में एडमिशन मिला. आगे चलकर उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज से गणित ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया.
बिना कोचिंग के की UPSC की तैयारी
वंदना का मानना था कि सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता. उन्होंने कोचिंग जॉइन नहीं की, बल्कि खुद से नोट्स बनाकर 10 से 15 घंटे तक रोजाना पढ़ाई की. उनकी तैयारी में एनसीईआरटी किताबें, एम. लक्ष्मीकांत की पॉलिटी बुक, और यूट्यूब जैसी डिजिटल प्लेटफॉर्म अहम साधन बने.
सफलता की मंजिल – IAS बनने का सपना पूरा
कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम उन्हें 2021 में मिला, जब वंदना ने UPSC CSE में ऑल इंडिया रैंक 331 हासिल की. यह न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और स्कूल के लिए गर्व का क्षण था. जब वह रिज़ल्ट के बाद अपने स्कूल पहुंचीं तो उनका स्वागत किया गया और उन्हें रोल मॉडल माना गया.
निरंतरता ही सफलता की कुंजी (UPSC Success Story in Hindi)
वंदना की कहानी हमें यह सिखाती है कि बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अनुशासन, निरंतरता और आत्मविश्वास बेहद जरूरी है. सीमित संसाधन और चुनौतियों के बावजूद यदि मेहनत की जाए तो मंजिल जरूर मिलती है.
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