
AI की मदद से नोट्स बनाकर CGPSC में टॉप, डिप्टी कलेक्टर बने देवेश साहू, शेयर किए सीक्रेट टिप्स
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC Result 2024) की परीक्षा में दुर्ग के देवेश साहू ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसे आज हजारों अभ्यर्थी प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं. लगातार तीन इंटरव्यू और दो में असफल रहने के बाद भी हार न मानने वाले देवेश ने तीसरे प्रयास में पहली रैंक हासिल कर यह साबित किया कि असफलता कभी पूर्णविराम नहीं होती बल्कि सफलता से पहले आने वाला एक अल्पविराम होती है. देवेश की तैयारी का अनोखा तरीका, सोशल मीडिया से दूरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग, अब तैयारी कर रहे युवाओं के लिए नया मॉडल बन रहा है.
देवेश साहू ने ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद CGPSC की तैयारी एक निजी कोचिंग संस्थान से की. डेढ़ साल कोचिंग करने के बाद उन्होंने दो साल तक घर में रहकर बिना किसी डिस्टर्बेंस के तैयारी जारी रखी. इसी दौरान उन्होंने तीन बार इंटरव्यू दिया और आखिरकार सफलता हासिल की.
देवेश साहू ने लोकल 18 को बताया कि उनकी सफलता में तकनीक की बड़ी भूमिका रही. उन्होंने करंट अफेयर्स, समाजशास्त्र और दर्शनशास्त्र के नोट्स AI की मदद से तैयार किए. उन्होंने कई स्टैंडर्ड बुक्स और विभिन्न कोचिंग सामग्री के साथ डिजिटल रिसोर्स का भी इस्तेमाल किया.
सोशल मीडिया से बनाई दूरी
देवेश ने अपनी तैयारी के दौरान इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया. उनका मानना है कि सोशल मीडिया अभ्यर्थियों के फोकस को कम करता है और समय को अनावश्यक रूप से बर्बाद करता है.
अतीत की रैंक और संघर्ष की कहानी
इससे पहले 2019 में देवेश को 219वीं रैंक और 2023 में 179 रैंक मिली थी लेकिन पद सीमित होने के कारण चयन नहीं हो पाया. बावजूद इसके उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी और आखिरकार पहली रैंक लाकर अपना लक्ष्य हासिल किया.
परिवार का समर्थन और पृष्ठभूमि
देवेश रिटायर्ड इलेक्ट्रिशियन होलदर प्रसाद साहू के पुत्र हैं. उन्होंने भिलाई सेक्टर-10 सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई की और उसके बाद इंजीनियरिंग GEC जगदलपुर से पूरी की.
असफलता से मत डरिए
अपनी सफलता के बाद देवेश साहू ने अभ्यर्थियों को संदेश देते हुए कहा, ‘असफलता अल्पविराम है, पूर्णविराम नहीं. पढ़ाई को संघर्ष नहीं, जिम्मेदारी मानें. कम से कम 8 घंटे रोज पढ़ें और गलतियों को पहचानकर सुधारें.’ देवेश की सफलता केवल मेहनत की कहानी नहीं बल्कि धैर्य, तकनीक के सही उपयोग और आत्मविश्वास की जीत है. अब फर्स्ट रैंक हासिल कर वह डिप्टी कलेक्टर बनेंगे और भविष्य के अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बनेंगे.
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