
50000 कैदी हों या शरणार्थी छात्र, सबके लिए मसीहा बनी 17 साल की मन्नत, ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज में चयन
Success Story of Mannat Samra: ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज 2025 के टॉप 50 छात्रों में भारत के पांच होनहारों का नाम शामिल हुआ है. इन्हीं में से एक नाम है 17 वर्षीय मन्नत समरा का. यह पुरस्कार उन छात्रों को दिया जाता है जो पढ़ाई के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव भी ला रहे हैं. मन्नत समरा का नाम इस लिस्ट में शामिल होना भारत के लिए गर्व की बात है.
Success Story of Mannat Samra: जेल सुधार से जुड़ा काम
मन्नत समरा का मुख्य काम जेल सुधार से जुड़ा हुआ है. उन्होंने 50,000 से अधिक कैदियों की मदद की है. वह पूर्व-कैदियों के लिए भारत का पहला जॉब पोर्टल भी शुरू कर चुकी हैं. उनका प्रोजेक्ट ब्रिज ऐसे बिजनेस को सपोर्ट करता है जिन्हें पूर्व-कैदी चला रहे हैं. यह पहल उन्हें समाज में दोबारा स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है.
शरणार्थी बच्चों की टीचर
मन्नत का योगदान जेलों तक सीमित नहीं है. उन्होंने 100 से ज्यादा शरणार्थी छात्रों के लिए इंग्लिश क्लब शुरू किया है, जिससे उन्हें अंग्रेजी बोलना और समझना आता है. इसके साथ ही वह SAT और IELTS जैसी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद करती हैं. उनके कुछ छात्र अब स्टैनफोर्ड जैसी अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटियों में दाखिला पा चुके हैं.
पूर्वोत्तर भारत में रह रहे 10,000 से ज्यादा बर्मी शरणार्थियों को मन्नत ने शिक्षा और पोषण से जुड़ी मदद दी है. उन्होंने SustainaBite नाम से एक सामाजिक स्टार्टअप शुरू किया है. यह स्टार्टअप बीयर बनाने में बचने वाले अनाज से हाई-प्रोटीन आटा तैयार करता है. इस आटे से कमजोर वर्गों को सस्ते और पोषणयुक्त भोजन की सुविधा मिलती है.
पढ़ाई में भी अव्वल
मन्नत समरा सिर्फ सामाजिक काम में ही नहीं बल्कि पढ़ाई में भी बेहतरीन रही हैं. उन्होंने जयश्री पेरिवाल इंटरनेशनल स्कूल से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की है. उनकी सोच, मेहनत और समाज के प्रति समर्पण उन्हें भारत की सबसे प्रेरणादायक युवाओं में से एक बनाता है.
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