
डॉक्टर नहीं बन सके? अब आर्ट से इलाज की दुनिया में बनाएं करियर
Medical Illustration: कभी आपने किसी बायोलॉजी की किताब में इंसानी हृदय, फेफड़े या नर्व सिस्टम के चित्रों को देखा है? कभी अस्पताल के पोस्टर में सर्जरी या शरीर के अंदरूनी हिस्सों के ग्राफिक चित्र पर गौर किया है? तो आप पहले ही मेडिकल इलस्ट्रेशन से मिल चुके हैं – उस अनदेखे कलाकार से जो कला के जरिए चिकित्सा की जटिल दुनिया को समझने लायक बनाता है. ऐसे में आज हम आपको डिटेल में बताएंगे इस प्रोफेशन और करियर के बारे में.
क्या है मेडिकल इलस्ट्रेशन?
मेडिकल इलस्ट्रेशन एक ऐसा पेशा है जिसमें कलाकार वैज्ञानिक और चिकित्सा से जुड़े विषयों को सटीक, स्पष्ट और आकर्षक चित्रों में बदलते हैं. इसका उद्देश्य है:
- चिकित्सा की जटिल प्रक्रियाओं को समझाना
- छात्रों को पढ़ाई में मदद करना
- मरीजों को उनके इलाज या सर्जरी के बारे में विज़ुअल तरीके से समझाना
यह एक ऐसी विधा है जहां कला और विज्ञान का संगम होता है.
मेडिकल इलस्ट्रेटर कौन होता है?
मेडिकल इलस्ट्रेटर एक विशेष प्रकार का कलाकार होता है, जिसे न केवल ड्राइंग और डिजाइन की समझ होती है बल्कि उसे शरीर की एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और मेडिकल टर्म्स की भी जानकारी होती है. वे स्केचिंग, डिजिटल आर्ट, 3D मॉडलिंग, एनीमेशन और इंटरैक्टिव ग्राफिक्स के ज़रिए मेडिकल जानकारी को सटीक रूप से प्रस्तुत करते हैं.
मेडिकल इलस्ट्रेशन किन-किन क्षेत्रों में इस्तेमाल होती है?
मेडिकल इलस्ट्रेशन केवल किताबों तक सीमित नहीं है. यह कई क्षेत्रों में जरूरी बन चुकी है:
1. स्टडी मटिरियल में:
- मेडिकल और नर्सिंग छात्रों की टेक्स्टबुक्स में
- एटलस (जैसे Gray’s Anatomy) में
- ऑनलाइन मेडिकल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स में
2. डॉक्टर-मरीज संवाद में:
- ऑपरेशन से पहले मरीज को प्रक्रिया समझाने में
- बीमारी के कारण और प्रभाव दिखाने में
- हेल्थ अवेयरनेस पोस्टर्स और ब्रोशर में
3. शोध और साइंटिफिक जर्नल्स में:
- रिसर्च पेपर में किसी नई प्रक्रिया या खोज को चित्र के रूप में दिखाना
- जटिल मेडिकल इनोवेशन को विज़ुअल बनाना
4. एनिमेशन और थ्री-डी वीडियो में:
- मेडिकल एनीमेशन फिल्म्स और डॉक्युमेंट्री
- मोबाइल ऐप्स और हेल्थ टेक सॉफ्टवेयर
एक मेडिकल इलस्ट्रेशन कैसे बनती है?
एक पेशेवर मेडिकल इलस्ट्रेटर को चित्र बनाते समय कई चरणों से गुजरना पड़ता है:
- रिसर्च: पहले विषय की गहराई से समझ और मेडिकल स्रोतों का अध्ययन
- रेफरेंस इकट्ठा करना: मेडिकल इमेजिंग (MRI, X-ray, CT स्कैन) का उपयोग
- स्केच तैयार करना: पहले पेंसिल से प्रारूप बनाना
- डिजिटल डिज़ाइन: कंप्यूटर पर सटीकता और रंग भरना
- रिव्यू और फीडबैक: डॉक्टरों या मेडिकल एक्सपर्ट से जांच कराना
- फाइनल आर्टवर्क: क्लाइंट के उपयोग अनुसार अंतिम संस्करण तैयार करना
भारत में मेडिकल इलस्ट्रेशन की पढ़ाई कहां होती है?
भारत में यह अभी उभरता हुआ क्षेत्र है लेकिन धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ रही है. कुछ संस्थान जहां इस क्षेत्र से जुड़ी ट्रेनिंग मिलती है:
- NID (National Institute of Design) – डिजाइन में विशेषज्ञता
- AIIMS और JIPMER जैसे संस्थानों में बायोमेडिकल कम्युनिकेशन की रिसर्च
- प्राइवेट संस्थानों में बायोलॉजिकल आर्ट या मेडिकल विज़ुअलाइजेशन के कोर्स
विदेशों में Johns Hopkins University जैसी जगहों पर मेडिकल इलस्ट्रेशन के लिए स्पेशल मास्टर्स प्रोग्राम उपलब्ध हैं.
करियर के अवसर और संभावनाएं
मेडिकल इलस्ट्रेशन के क्षेत्र में करियर की कई दिशा हैं:
- शैक्षणिक प्रकाशन संस्थानों में – बुक पब्लिशर्स और ऑनलाइन कोर्स डिजाइनर्स
- अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में – हेल्थ एडुकेशन के लिए
- फार्मा कंपनियों में – दवा की जानकारी देने वाले ग्राफिक्स तैयार करने के लिए
- बायोटेक्नोलॉजी और रिसर्च संस्थानों में
- फ्रीलांस इलस्ट्रेटर – निजी प्रोजेक्ट्स और क्लाइंट बेस्ड काम के लिए
कितनी होती है कमाई?
भारत में शुरुआती स्तर पर मेडिकल इलस्ट्रेटर की सैलरी 25,000 रुपए – 40,000 रुपए प्रति माह हो सकती है. अनुभव बढ़ने पर और अगर आप इंटरनेशनल क्लाइंट्स के लिए काम करते हैं तो 1 लाख रुपए से अधिक की कमाई भी संभव है.
फ्रीलांस इलस्ट्रेटर प्रोजेक्ट बेस्ड चार्ज करते हैं – एक थ्री-डी मेडिकल एनिमेशन प्रोजेक्ट के लिए 50,000 रुपए से 5 लाख रुपए तक का बजट हो सकता है.
मेडिकल इलस्ट्रेशन का भविष्य
जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और डिजिटल एजुकेशन का दायरा बढ़ रहा है, मेडिकल इलस्ट्रेशन की मांग भी तेज़ी से बढ़ेगी.
- AR/VR आधारित मेडिकल सिमुलेशन में इसकी ज़रूरत होगी
- टेलीमेडिसिन और हेल्थ ऐप्स के लिए सरल विज़ुअल्स की जरूरत बढ़ेगी
- मेडिकल मार्केटिंग और हेल्थ अवेयरनेस में यह अनिवार्य होगा
यह क्षेत्र न केवल पेशेवर रूप से फलता-फूलता है, बल्कि एक ऐसी भूमिका निभाता है जो लाखों लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समझने में मदद करता है.
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